आसमाँ सर पर उठा रखा है

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ये क्या हाल बना रखा है
आसमाँ सर पर उठा रखा है

इतना शोर क्यों मचाते हो
राई का पहाड़ बना रखा है

तेरे मेरे बीच की बात थी
दुनिया जहाँ को बुला रखा है

वफ़ा पर बहस मंज़ूर नहीं
शक को खाई बना रखा है

आईना सबको दिखाते हो
खुद…

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न रूठ इतना भी किसी बहाने के लिए

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ऐ दिल न रूठ इतना भी किसी बहाने के लिए
ऐसा न हो कुछ बचे ही न मनाने के लिए

न कर यूँ बेक़दरी हर इल्तिजा हर फ़रियाद की
कि हाथ ही न कोई बचे दुआ में उठाने के लिए

न कर इतना भी यकीन अपनी इस मोहब्बत पर
वजह कोई…

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कहती हो कि आदतें अच्छी पाल रखी हैं तुमने

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कहती हो कि आदतें अच्छी पाल रखी हैं तुमने
फिर ये आदतें ही क्यूँ बुरी लग जाती हैं तुम्हें
बेवजह ही चुप रह जाना
बस यूँ ही कभी भी खुश हो जाना
डर को तुम्हारे हँसी में टाल देना
बेखबर लापरवाह ही सही
पर जिए जाना भी तो एक आदत ही है
पैर छूना भी तो एक…

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कम से कम आज तो मुस्करा दो एक बार

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खुश होकर रह जाते हो हर बार
कम से कम आज तो मुस्करा दो एक बार

माना कुछ ख़ास नहीं आज का दिन
पर आता है साल में एक ही बार

मोमबत्ती एक बढ़ गयी तो क्या
फूल भी तो एक ज़्यादा है अब की बार

मेरी हर वजह बहाना…

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कुछ ख़्वाब हम बुनने लगते हैं

Photo by Bhautik Andhariya on Unsplash

सच में सच निकलने लगते हैं
कुछ ख़्वाब हम बुनने लगते हैं

जन्मों का सफर हो जैसे एक नज़र
यूँ ही नहीं आप अपने से लगने लगते हैं

रक़ीबों की भीड़ में हम भी एक रक़ीब हों
उम्मीदें कुछ खुद से भी रखने लगते हैं

मारे डर के यहाँ पसीना…

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कि हर ख़बर बेख़बर न थी

Photo by Jane Boyd & ECE Workshops on Unsplash

ये तो हमको ख़बर ही न थी
कि हर ख़बर बेख़बर न थी

माना कि चाँद में दाग तो होते हैं
पर उसके नूर में कोई कमी न थी

जब आँखें ही करें गैरों से वफ़ा
चाह कर भी कोई बात छिपी न थी

एक बार तो हाल पूछते सौरभ
इतनी…

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